उत्तरकाशी –गर्मी का मौसम शुरू होते ही  उत्तराखंड में वनाग्नि  का खतरा मंडराने लगा है। 14 फरवरी से आधिकारिक तौर पर ‘फायर सीजन’ शुरू हो चुका है, जो अगले चार महीनों तक चलेगा। इस बार सूखे सर्दियों  के कारण जंगलों में नमी की कमी है, जिससे आग फैलने का जोखिम बढ़ गया है। वनाग्नि की घटनाओं को रोकने हेतु आज प्रदेश भर में फॉरेस्ट फायर मॉक ड्रिल अभ्यास हुआ जिस क्रम में उत्तरकाशी वन प्रभाग में भी जोर शोर से मॉक ड्रिल अभ्यास किया गया ।
1. हाई-टेक निगरानी: का सहारा
वन विभाग इस वर्ष वनाग्नि की रोकथाम के लिए आधुनिक तकनीक का व्यापक उपयोग कर रहा है:
2. धरातल पर तैयारी: मॉक ड्रिल और फायर लाइन्स
आग पर त्वरित काबू पाने के लिए विभाग ने निम्नलिखित कदम उठाए हैं:

मॉक ड्रिल:  उत्तरकाशी वन प्रभाग द्वारा फायर मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया ताकि आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया (Response Time) को परखा जा सके।

फायर लाइन्स की सफाई: जंगलों के बीच में खाली पट्टियां (Fire Lines) बनाई गई हैं ताकि आग एक हिस्से से दूसरे हिस्से में न फैले।

आम जनता से अपील
  • जंगलों के पास ज्वलनशील पदार्थ न छोड़ें।
  • खेतों में कूड़ा जलाते समय सावधानी बरतें और आग को अनियंत्रित न होने दें।
  • कहीं भी आग या धुआं दिखने पर तत्काल नजदीकी वन चौकी या हेल्पलाइन नंबर पर सूचित करें।

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