पौड़ी–मानव-वन्यजीव संघर्ष के बीच उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल से एक दुखद और हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। संकट की स्थिति में अपनी जान जोखिम में डालकर काम कर रहे वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ अभद्रता व मारपीट की घटना हुई है।
इस घटना के बाद भारतीय वन सेवा संघ उत्तराखंड चैप्टर ने कड़ा रुख अपनाते हुए इस हिंसा की कड़े शब्दों में निंदा की है और दोषियों के खिलाफ तत्काल कठोर कार्रवाई की मांग उठाई है।

मानव-वन्यजीव संघर्ष की आड़ में वनकर्मियों पर हमला
पौड़ी गढ़वाल जनपद में मानव-वन्यजीव संघर्ष की गंभीर और संवेदनशील परिस्थिति के बाद, क्षेत्र में शांति और सुरक्षा व्यवस्था बनाने में जुटे गढ़वाल वन डीएफओ महातिम यादव (आई एफ एस), एस डी ओ आयशा बिष्ट, रेंजर नक्षत्र शाह और अग्रिम पंक्ति के वनकर्मियों के साथ कुछ असामाजिक तत्वों ने मारपीट और दुर्व्यवहार किया।
संघ ने इस घटना पर रोष जताते हुए कहा कि संकट की हर घड़ी में वन विभाग के अधिकारी दिन-रात धरातल पर डटे रहते हैं। ऐसे समय में अग्रिम पंक्ति के निष्ठावान अधिकारियों पर हमला बेहद शर्मनाक और अस्वीकार्य है।
पीड़ित परिवार के प्रति गहरी संवेदना, लेकिन हिंसा बर्दाश्त नहीं
भारतीय वन सेवा संघ ने अपने बयान में स्पष्ट किया:
“मानव-वन्यजीव संघर्ष में किसी परिवार द्वारा अपने प्रियजन को खोना अत्यंत पीड़ादायक है। शोक संतप्त परिवार और प्रभावित समुदाय के प्रति हमारी गहरी संवेदनाएं हैं। परंतु, अपने कर्तव्यों का पालन कर रहे अधिकारियों के साथ हिंसा, धमकी या मारपीट किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
संघ ने चिंता जताई कि इस प्रकार की हिंसक घटनाएं न केवल अधिकारियों की सुरक्षा और सम्मान को ठेस पहुंचाती हैं, बल्कि अपनी जान हथेली पर रखकर काम करने वाले मैदानी वनकर्मियों के मनोबल को भी तोड़ती हैं।
संघ की सख्त मांग: कानून का शासन सर्वोपरि, दोषियों पर हो कड़ी कार्रवाई
भारतीय वन सेवा संघ, उत्तराखंड ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन से मांग की है कि:
- सरकारी कार्य में बाधा डालने और अधिकारियों के साथ हिंसा करने वाले दोषियों के खिलाफ शीघ्र और कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
- कानून का शासन सर्वोपरि है और ऑन-ड्यूटी अधिकारियों की सुरक्षा हर हाल में सुनिश्चित की जानी चाहिए।
- अधिकारियों के साथ एकजुटता और शांति की अपील

