देहरादून –खबर राजधानी देहरादून से जहां #सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में अरुण तोमर पर एक शराब कारोबारी दिनेश मल्होत्रा द्वारा आरोप लगाए जा रहे हैं… दिनेश मल्होत्रा द्वार CM पुष्कर सिंह धामी के नाम पर कथित तौर पर पैसे वसूलने के आरोप लगाए गए हैं। इन आरोपों को लेकर आबकारी कारोबार से लंबे समय से जुड़े एक कारोबारी ने बयान दिया है .. उन्होंने कहा कि केवल किसी के बयान के आधार पर आरोपों को सच नहीं माना जा सकता। उन्होंने अरुण तोमर द्वारा मुख्यमंत्री के नाम पर पैसे लेने के आरोपों से पूरी तरह असहमति जताई और इन्हें निराधार बताया।
कारोबारी ने उत्तराखंड में आबकारी व्यवस्था में हुए बदलाव का #जिक्र करते हुए कहा कि राज्य गठन के बाद स्थानीय लोगों को शराब कारोबार से जोड़ने के उद्देश्य से नीतियां बनाई गईं। उन्होंने बताया कि सरकार की नीति और कैबिनेट के फैसलों के बाद ही आबकारी से जुड़े नियम और व्यवस्थाएं तय होती हैं। उन्होंने नैनीताल का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले जिले में शराब की दुकानें सीमित थीं, जिसके कारण कुछ क्षेत्रों में अवैध शराब की समस्या सामने आती थी। इसके बाद सरकार ने मांग के आधार पर दुकानों की संख्या बढ़ाई, ताकि लोगों को निर्धारित स्थानों पर शराब उपलब्ध हो सके और अवैध कारोबार पर रोक लगाई जा सके।
उन्होंने इस दावे को भी गलत बताया कि नैनीताल जिले के सभी FL-2 या थोक शराब लाइसेंस किसी एक व्यक्ति के नियंत्रण में हैं। कारोबारी के मुताबिक, नैनीताल में छह से अधिक FL-2/थोक लाइसेंस अलग-अलग लोगों के नाम पर आवंटित हैं। उन्होंने कहा कि यदि वायरल वीडियो में लगाए गए आरोपों के समर्थन में कोई ठोस तथ्य या प्रमाण हैं तो उन्हें सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
उन्होंने दोहराया कि यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ लगाए गए आरोपों में कोई सच्चाई है तो उसके समर्थन में दस्तावेज या अन्य प्रमाण सामने आने चाहिए, ताकि पूरे मामले की वास्तविकता स्पष्ट हो सके।
अन्य शराब कारोबारियों ने कहा कि सोशल मीडिया पर सरकार और मुख्यमंत्री को लेकर किए जा रहे दावों की जांच होनी चाहिए। कारोबारियों का कहना है कि यदि किसी ने अवैध रूप से पैसे दिए या लिए हैं तो यह भी जांच का विषय है और जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बिना सत्यापन के आरोप लगाने से सरकार के साथ-साथ पूरे शराब कारोबार और इससे जुड़े लोगों की छवि भी प्रभावित हो रही है। कारोबारियों ने दावा किया कि वे लंबे समय से इस व्यवसाय से जुड़े हैं और उन्होंने किसी को भी अवैध रूप से पैसा नहीं दिया है। उनके अनुसार लाइसेंस और कारोबार से जुड़ी रकम नियमानुसार राजस्व के रूप में जमा की जाती है। कारोबारियों ने दिनेश मल्होत्रा के आरोपों की भी जांच किए जाने की मांग की है।
पूरे मामले में निष्पक्ष जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। आरोप सही हैं या गलत, इसका फैसला उपलब्ध सबूत और आधिकारिक जांच के आधार पर ही होना चाहिए।
